प्रसूता माँ के लिए आवश्यक कार्य कलाप - Procreative activities necessary for Mom

प्रसूता माँ के लिए ध्यान देने योग्य :-

  • चना, चने की दाल, इमली, अमचुर की खटाई न खिलाएं. कवीट व दही की खटाई डे सकते है.
  • प्रसव के 15 दिनों बाद सौंठ के लड्डू चालू कर दें. जब तक सौंठ लड्डू खाएं तब तक धुप में या आग के सामने न बेठें और खटाई न खिलाएं.
  • माँ की बदपरहेजी से माँ के साथ साथ माँ का दुध पीने वाला बच्चा भी बीमार पड़ सकता है.  अतः माँ के भोजन में विशेष सावधानी आवश्यक है. माँ को हमेशा ताज़ा और गरम खाना ही देवें.
  • सुबह शाम माँ-बच्चे की तेल-मालिश करवाएं.
  • जच्चा के सिर में घी लगायें. घी में जायफल, सुपारी, सुखिगिरी, पीपलामूल घसकर सिर में चालीस दिन तक मालिश कराएँ. चालीस दिन बाद बादाम का तेल लगायें.
  • माँ के आंचल का पहला दुध बच्चे को अवश्य ही पिलायें. यह बच्चे में रोग - प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है.
  • बारात में धोड़ी के साथ न जाएँ.
  • माँ का दुध बच्चे के लिए अमृत समान है अतः यह बच्चे को मिलना चाहिए.

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