Vastu Ke Tips -जानें प्रयोग द्वारा शुभ अशुभ भूमि को

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Vastu Ke Tips -जानें प्रयोग द्वारा शुभ अशुभ भूमि को 

 

प्रयोग 1 मिट्टी द्वारा भूमि की परख
गृह निर्माणकर्ता अपने हाथ से जिस भूखण्ड पर वह गृह निर्माण करना चाहता है। भूखण्ड के मध्य भाग में (जहां पर वह भवन बनाना चाहता है) उस जगह पर 2 फुट लम्बा 2 फुट चैड़ और 2 फुट गहरा खड्डा खोदना चाहिए खोदी गई मिट्टी को किसी बर्तन या चादर पर इक्ट्ठी कर लेनी चाहिए। फिर उस मिट्टी को उसी खड्डे में फिर से भरनी चाहिए। तथा खड्डे में भरी हुई मिट्टी का फल इस प्रकार से जानना चाहिए।
1. खड्डा भरने से मिट्टी कम पड़ गई है तो उस भूखण्ड पर गृह निर्माण करना अषुभ फलदायी होता है।
2. खड्डा अगर बराबर मिट्टी से भर गया हो तो उस भूखण्ड पर गृह निर्माण करना शुभ फल देने वाला होता है।
3. खड्डा मिट्टी से पूर्ण भर गया है और मिट्टी शेष बच गयी है अर्थात् मिट्टी खड्डे में भरने के बाद खड्डे पर मिट्टी का टीला सा बन गया है। तो ऐसे भूखण्ड पर गृह निर्माण करना उत्तम होतो है।
प्रयोग 2 पानी के द्वारा भूमि की परख
एक हाथ लम्बा, एक हाथ चैड़ा व एक हाथ गहरा खड्डा खोदना चाहिए। खड्डा खोदने के बाद उसे एक साथ लबालब पानी से भर देना चाहिए। फिर उस खड्डे से सौ कदम दूर जाकर वापस आकर पानी का स्तर खड्डे में देखना चाहिए । और निम्न फल से समझना चाहिए ।
1. इतने समय में खड्डे में डाले गये पानी का स्तर आपने जहां देखा था वह ज्यों का त्यों बना हुआ है तो उस भूमि को श्रेष्ठ समझना चाहिए ।
2. अगर डाले गये पानी का स्तर खड्डे में आधा या आधो से ऊपर तक है तो उस भूमि गृह निर्माण करना साधारण फल देने वाली भूमि समझना चाहिए।
3. और अगर इतने समय में (सौ कदम जाकर आने तक) डाले गये जल को खड्डे में पूर्णतया सोख लिया जाता है या वह खड्डा पानी के दबाव के कारण छिन्न-भिन्न हो गया है या ढह गया है इस प्रकार की भूमि पर भवन निर्माण करना हानिप्रद होता है। ऐसी भूमि पर भवन निर्माण नहीं करना चाहिए।

प्रयोग 3 जलती हुई बत्तियों द्वारा भूमि की परख (वर्ण के अनुसार भूमि की जांच )
उपरोक्त नाप के अनुसार खड्डा खोदे । सांयकाल एक दीपक ले। उस दीपक में चार दिषाओं के अनुसार परिकल्पना करके चार बतियाॅ बनाकर स्थापित करे और दीपक को शुद्ध देषी घी से भर देना चाहिए फिर उस दीपक को मिट्टी के कलष में रखना चाहिए। और चारों बत्तियों को दियासलाई से जला देना चाहिए। तथा जलाई गयी चारों बत्तियों को क्रमषः (1) उत्तर दिषा की बत्ती को ब्राह्मण वर्ण (2) पूर्व दिषा में जली हुई बत्ती को क्षत्रिय वर्ण (3) दक्षिण दिषा की तरफ जलाई गयी बत्ती को वैष्य वर्ण तथा (4) पष्चिम दिषा में जलती हुई बत्ती को शूद्र वर्ण के लिए शुभ भूमि मानत हुए परिकल्पना करें फिर मिट्टी के कलष पर स्थापित दीपक सहित खड्डे में रख देना चाहिए। फिर उस दीपक को जलती हुई बत्तीयों को देखते रहना चाहिए। जिस दिषा कि बत्ती अधिक देर तक अपना प्रकाष फैलाये रखे उस भूमि को उसी वर्ण के गृह निर्माण हेतु शुभ समझना चाहिए।

प्रयोग 4 पुष्प द्वारा भूमि की परख
सांयकाल 2 फुट गहरा, 2 फुट चैड़ा, तथा 2 फुट लम्बा खड्डा खोदना चाहिए उस खड्डे में वर्ण के अनुसार चार प्रकार के पुष्प (सफेद, लाल, पीले एवं काले) डालने चाहिए। दूसरे दिन प्रातःकाल नित्य कर्माें से निवृत होकर स्नान करने के बाद उन्हें देखना चाहिए। उन पुष्पों में जिस रंग का पुष्प कुम्लाया न हो वह भूमि उसी वर्ण के लिए शुभ माननी चाहिए।

वर्ण पुष्प
ब्राह्मण सफेद
क्षत्रिय लाल
वैष्य पीला
शूद्र काला
प्रयोग 5 भूमि पर विश्राम द्वारा परख
गृह निर्माण कर्ता जिस जगह की भूमि पर गृह निर्माण करना चाहता है उस जगह की भूमि पर जाये। वहां विश्राम करे, चहल-कदमी करे, अपना कोई कार्य करे, सोये, अगर उस भूमि पर गृह निर्माण करता का मन प्रसन्न व काम करने का उत्साह उसमें जागृत होए तो वह भूमि उस व्यक्ति के लिए श्रेष्ठ होती है।

प्रयोग 6 भूमी का रंग गन्ध व घास के आधार पर परख
वर्ण भूमि का रंग भूमि का गंध घास के आधार पर भूमि
ब्राह्मण सफेद घृत गन्ध कुषा युक्त
क्षत्रिय लाल रक्त गन्ध भुज युक्त
वैष्य पीली अन्न गन्ध दुब युक्त
शूद्र काली मद्य गन्ध कांस युक्त

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