रुणिचा - Baba Ramdev Runicha Mela Dates 2015 and History Jeevani, Jaisalmer, Rajasthan

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बाबा रामदेव (रुणिचा) - Baba Ramdev Runicha History Jeevani, Jaisalmer, Rajasthan

अजमाल जी द्वारिकाधीश के अनन्य भक्त होने के कारण एक दिन द्विरिका नाथ के मंदिर गए, वहाँ उन्होंने क्रोधित होकर एक लड्डू भगवान की मूर्ति पर मारा. पुजारी द्वारा यह कहने पर की "भगवान समुद्र में है",  भगवान से मिलने हेतु वे समुद्र में कूद गए, तभी भगवान विष्णु प्रकट हुए और अजमाल के पुत्र रूप में अवतरित होने का वरदान दिया की भादवा सुदी दूज के दिन आकाश में चंदा चमकेगा उसी दिन आपके घर अवतार लूँगा.

भादुड़े री दूज रो चन्दो करें प्रकाश l

थारे पालने आवसा रखिजो विश्वास ll

और वरदानुसार केसर कुमकुम के पैर घर के आंगन में मण गए, पानी का दुध बन गया, केसर की वर्षा अजमाल जी महलों पर  होने लगी.  संवत् 1461 भाद्वासुदी दूज शनिवार के दिन द्वारिकानाथ ने अजमाल जी के घर पालने में अवतार लिया, जिसका नाम Ramdev रखा गया.

रामदेवजी ने सात वर्ष की आयु में भैरव नामक राक्षश को मारकर पोकरण नामक शहर बसाया. बाबा रामदेव ने अनेक चमत्कार (परचे) दिखाए. उफनते हुए दुध का बर्तन पालने से ही नीचे उतार दिया, अपने भांजे को पुनर्जीवित किया, कपड़े  के घोड़े को हवा में उड़ाया, बनिए के जहाज को डूबने से बचाया, बंजारे की मिश्री का नमक बना दिया, जाम्भाजी के तलब का मीठा पानी खारा बना दिया. हरजी भाटी को परचा, बक्शे खाती के मरे हुए पुत्र को पुनर्जीवित किया तथा पांच पीरों के लिए मक्का मदीना से उनके बर्तन मंगवाए.  इनके अतिरिक्त कई अन्य रोचक प्रसंग Baba Ramdev Runicha के सम्बन्ध में प्रसिद्ध है.

Baba Ramdev ji छुआछूत की भावना से दूर रहकर निम्न जाती के लोगो के घर जाकर तम्बूरे की संगत से भजन गाया करते थे. उनके साथ भजन गाने वाली मेघवाल जाती की कन्या "डाली बाई"थी. उसके माता पिता का देहांत हो चुका था. रामदेव जी ने उसकी पाल-पोस कर बड़ा किया. डालीबाई बाबा Ramdev के बछड़े चराया करती थी. जब बाबा ने समाधि लेने का निश्चय किया तब डालीबाई उनके पास आकर बोली "आप समाधि न लें.और यदि आपने समाधि लेने का निश्चय कर लिया है सर्वप्रथम मैं समाधि लुंगी"  Ramdev ji ने कहा " पहले मैं समाधि ले लूँ फिर तुम लेना." इस पर डाली बाई ने कहा , " यदि समाधि खोदते वक्त कंघी निकली तो पहले मैं और यदि खडाऊ (चरण पादुका) तो आप." और डालीबाई की इच्छा पहले पूरी हुई. पहले डालीबाई ने समाधि ली और फिर बाबा रामदेव ने समाधि ली और वह स्थल आज Ramadevra के नाम से विश्वविख्यात है. लाखों की संख्या में दर्शनार्थी यहाँ दर्शन लाभ लेने के लिए दूर दूर से पैदल आते है और मनवांछित वरदान प्राप्त करते है.

यह भी दन्त कथा है की समाधि लेने से पूर्व Baba Ramdev ने अपने पुत्रों से कहा की मेरे समाधि लेने के बाद फिर से समाधि को न खोदना.और ऐसा करने से हर पीढ़ी में एक सिद्ध होगा. यह कह कर रामदेव जी ने समाधि ले ली. तीन दिन बाद हरभू जी ने जब सुना की Ramdev ji ने Samadhi ले ली तो वै उनके पुत्रों से मिलने चल पड़े. रास्ते में एक जाल वृक्ष के नीचे देखा  रामदेवजी बैठे एक घोड़े को घास चरा रहे है. रामदेव जी ने हरभू जी को देखकर आवाज लगाई और कहा "तुम घर चलो मैं अभी आता हूँ और यह कटोरा मेरी माता को दे देना ." जब हरभू जी घर पहुंचे और कटोरा रामदेवजी की माँ को दिया तो पुत्रों ने सोचा शायद रामदेव जी समाधि से बाहर निकल आयें है और उन्होंने Samadhi को खोदना शुरू कर दिया, लेकिन अंत में उन्हें फूल ही दिखाई दिया. तभी आकाशवाणी हुई मूर्खो तुम्हारी पीढ़ी में कोई पीर नहीं होगा और तुम "कावा" होना अर्थात पंडा होना. यात्रियों से चढ़ावा आये वही खाना.

Ramdev Mandir के पास ही एक कुण्ड (बावड़ी ) है, जहाँ यात्री नहाते है और उस पानी को गंगाजल की तरह ही पवित्र माना जाता है. यह आस्था है की उसके ऊपर बनी खिड़की से कूदकर बावड़ी में स्नान करने से "कोढ़" रोग दूर हो जाता है, अंधे को आँखे मिल जाती है. यह पावन कथा ही बाबा रामदेव जी की जीवनी (History of Baba Ramdev ji, Runicha Ramdev Peer) है.

Baba Ramdev Mela (Runicha Dham) date 2015

23 नवम्बर 2015 - यहाँ रुणिचा में हर वर्ष भादवा सुदी – १० (दशमी) 23 November 2015 को लगेगा.

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