Bundi History and Tourist Places - जाने बूंदी का इतिहास और इसके दर्शनीय स्थल

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Bundi History and Tourist Places - जाने बूंदी का इतिहास और इसके दर्शनीय स्थल

कोटा से 36 मिलोमीटर दूर यह छोटा सा रमणीय नगर बूंदी एक ऐसा अन्वेषित शहर है जिसके पास अपनी समृद्ध ऐतिहासिक संपदा है। यह ऐतिहासिक नगर चैहान वंश के वंशज हाड़ा चैहानों द्वारा शासित हाड़ौती राज्य की राजधानी रह चुका है। सन् 1193 में जब पृथ्वीराज चैहान सुल्तान मोहम्मद गौरी से हार गया उस समय कई चैहानों ने मेवाड़ की ओर कूच कर वहां आश्रय लिया और राणा के मित्र बन गये जब कि अन्य युवा सैनिको ने चंबल घाटी की ओर प्रस्थान किया और वहां बस रही मीणा एवं भील जनजातियों पर अपना आधिपत्य कर लिया। कर तरह उन्होंने हाड़ौती राज्य की नींव रखी। बाद में चंबल नदी के दोनों किनारों पर स्थित हाड़ौती राज्य की दा शाखाओं को अलग अलग कर बूंदी एवं कोटा राज्य की पृथक स्ािापना की गयी। बूंदी तीन तरफ से अरावली पहाडिया से घिरा हुआ है और चार मुख्य द्वारों के साथ विशाल दीवारों के साथ विशाल दीवरों से सीमाबद्ध है। बूंदी तीन तरफ से अरावली पहाडि़यों से घिरा हुआ है और चार मुख्य द्वारों के साथ विशाल दीवारों से सीमाबद्ध है। यहां स्थित दर्शनीय स्मारक, मध्यगुीन किले, सुंदर महल, अचंभित कर देने वाली हवेलियां, सुंदर पत्थर की मूर्तिया व नक्ककाशीदार खंभों से युक्त छतरियों वाले मंदिर पर्यटकों में विशेष आकर्षण का केन्द्र है। नगर के बीचोबीच बनी नयनभिराम झील, इसके सौन्दय्र में चार चांद लगा देती है। अपनी बारीक नक्काशी व भिति चित्रों के लिए बूंदी देश में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

दर्शनीय स्थल
तारागढ़ या स्टार फोर्ट
यह गढ़ राजस्थान के अत्यधिक प्रभावशाली गढ़ों में से एक हैं इसका निर्माण इसवी सन् 1354 में हुआ था। घनी वृक्षावलियों युक्त पहाडी पर खडा अद्भूत सफेद गढ अपने अनूठे निर्माण से अजेय किलों की श्रेणी में गिना जाता है। दुर्ग में बना विशाल जलाशय कभी गढ़ में पानी उपलब्ध कराता ािा। किले के भीतर कई आकर्षक स्मसरक हैं जिनमें भीम बुर्ज प्रमुख है। भीम बुर्ज क निकअ बनी हुई छतरी का निर्माण भाई देवा ने करवाया था और यह अपनी शिल्प कला के लिए जानी जाती है। आज यह दुर्ग बूंदी का प्रमुख आकर्षक है।
महल
यह अद्भुत महल राजपूत वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है जिसमें बूंदी के कई भिति चित्र भी सज्जित हैं इस महल में हजारी पोल, नौबत खाना, अपनी पुरानी पानी की घड़ी के साथ हाथी पोल और दीवाने ए आम, छतर, महल, बाल महल एवं फूल महल विशेष आकर्षण के स्थल है।
रतन दौलत
राव राजा रतनसिंह जी द्वारा निर्मित यह देखने लायक स्मारक हैं जिसमें नौ घोड़ों के लिए अस्तबल व एक हाथिया पोल है।
चित्रशाला
यह चित्रशाला मनमोहक मण्डप और लघु भित्ति चित्रों की दीर्घा महल से अलंकृत हैं राग माला और रासलीला, राधाकृष्ण के परिष्कृत रंगीन दृश्य दीवार पर अंकित है। आज बूंदी के भिति चित्र विश्व प्रसिद्ध है व बूंदी की यात्रा चित्रशाला देखेने बिना पूण्र नहीं मानी जाती है।
नवल सागर
नवल सागर की चैकोर कृत्रिम झील किले से दिखाई जाती है। झील में कई छोटू टापू भी आए हुए है। इस झील में अना आयों के जल देवता जरुण का मन्दिर है, जो लगभग आधा जलमग्न है। इस झील में शहर व उसके महलों का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है जो बूंदी को अलौकिक आकर्षण प्रदान करता है।
रानी जी की बावड़ी
इस बावड़ी के खंभों पर उत्कृष्ट नक्काशी की हुई है तथा इसकी गहराई लगभग 46 मीटर हे जो पर्यअकों को अपनी और आकर्षित करती है। यहां पर ऊंची मेहराबी द्वार भी है जिसका निर्माण रानी नाथावतजी ने ईसवी सन् 1699 में करवाया था।
सुख महल
सुंदर बगीचे की हरियाली के बीचों बीच जेत सागर झील पर एक अद्भुत ग्रीष्मकालीन महल है। ऐसा माना जाता है कि सुख महल से मुख्य महलों तक एक भूमिगत सुरंग भी निकलती है। इस सुरंग का प्रयोग पुराने समय में युद्ध के दौरान किया जाता था।
ंफूल सागर
बीसवीं शताब्दी में बना फूल सागर एक आधुनिक महल है। जिसमें मानव निर्मित तालाब व सुंदर बीगचे है। अब यहां बूंदी के पूर्व शासक निवास करते है।
शिकार बुर्ज
पर्यटकों में पिकनिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो रहे इस रमणीक स्थन पर हरीयाली के बीच शाही शिकारी लाॅज बनी हुई है।
केशर बाग
शिकार बुर्ज के नजदीक स्थित इस बगीचे में बूंदी क पूर्व शासकों व उनकी रानियों की छतरियां हैं, जो नगर की समृद्ध वासतुकला की परिचायक है।
चैरासी खंभों वाला स्मारक
राव अनिरुद्ध द्वारा बनाया गया शिवलिंग के साथ चैरासी खंभों वाले स्मारक की सुदंरता देखने लायक है। स्मारक पर्यटकों को अपनी अद्भुत शिल्पकला को अपनी अद्भुत शिल्पकला से आकर्षित करती है।
जैत सागर झील - 2 किमी
जैत मीणा द्वारा पहाडि़यों के बच निर्मित यह रमणीय झील प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। झील के किनारे बने सुंदर बागान एवं स्मृतिकुंज देखने योग्य है।
बूंदी से भ्रमण
रामेश्वर - 45 किमी
यह प्राचीन शहर केशवरायजी विष्णु के मंदिर के लिए प्रसिद्ध हैं इस मंदिर की वास्तुकला व मूर्तिकला अलौकिक है। इसका निर्माण 1601 में बूंदी के महाराजा शत्रुसाल ने किया था। यहां पर प्रसिद्ध जैन मंदिर है।
बिजोलिया - 50 किमी
बिजोलिया का प्राचीन किला व शहर बूंदी चितौड़गढ़ मार्ग पर स्थित है। किले के एक तरफ स्थित ऊंचे रास्ते वाले आंगन के मध्य में भगवान बिजोलिया का प्राचीन किला व शहर बूंदी चितौड़गढ़ मार्ग पर स्थित है। किले के एक तरफ स्थित ऊंचे रास्ते वाले आंगन के मध्य में भगवान शिव का विशाल मंदिर है जिसके प्रवेश द्वार पर संरक्षक के रूप में खड़े भगवान गणेश की सुंदर मूर्ति है। यह स्थल आजकल पिकनिक स्पाॅट के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।
मैनाल - 70 किमी
मैनाल नदी ग्रेनाइट की पट्टियों के ऊपर से गुजरती है और 122 मीटर गहरे दर्रे के ऊपर कन्दरा में समा जाती है। यह स्थल शिव मंदिरों के समूह के लिए जााना जाता है। मंदिरों की दीवारों पर मंत्रमुग्ध करने वाली विभिन्न हिन्दू देवी-देवताओं की नक्काशी है। चह चितौड़गढ़ बूंदी रोड़ पर स्थित है।
तलवास - 53 किली
यह स्थल राजा अजीतसिंह द्वारा निर्मित किले के लिए जाना जाता है। धूलेश्वर महादेव का मंदिर और किले से जुड़ा रमणीय जल प्रताप देखने योग्य है। आकर्षक रतन सागर झील करीब ही है और बारिश के मौसम में यह स्थान भालू व हिरणों जैसे वन्य जीवों के लिए स्वर्ग समान है।
दुगारी - 65 किमी
प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित दुगारी के भव्य किले के भीतर स्थित राम मंदिर में प्राचीन भित्ति चित्रों के अवशेष देखे जा सकते है। यह स्थल पुरातत्व विशेषज्ञों में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहाा है।
इन्द्रग्रह - 747 किमी
यह सुंदर गांव इन्द्रगढ़ किला और निकटवर्ती स्थान देवीमाता एवं कमलेश्वर के मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। इंद्रगढ़ की स्थापना बूंदी के इंद्रसाल सिंह ने की थी। आज यह स्थल प्रदेश के ्रपमुख ऐतिहासिक केन्द्रों में गिना जाता है।
मेले और त्यौहार
कजली तीत - जुलाई -अगस्त
राजस्थान के अन्रू प्रातों में मनाए जाने वाले तीज के त्यौहार की अपेक्षा इस त्यौहार को अलग तरह से मनायया जाता है। तीज जो कि श्रावणी मास के तीसरे दिन मनाई जाती है। कजली तीज भाद्र माह के तीसरे दिन मनाई जाती है। इसमें सुसज्ति पालकियों में तीज का उल्लासमय जुलूस मनोरम नवल सागर से आरंभ होकर कुंभा स्टेडियम पर समाप्त होता हैं इस जुलूस में स्थानीय कलाकारों व हाड़ौती प्रदेश के अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश करते हैं। यह जुलूस दो दिन के लिए निाकला जाता है, जबकि त्यौहार की उमंग आठवें दिन अर्थात् जन्माष्टमी तक रहती है।
तेजाजी मेला - दुगारी, सितम्बर-अक्ूटबर
यह पांच दिवसीय मेला लोक देवता तेजा जी को समर्पित है। भारी संख्या में तीर्थ यात्री इस समय एकत्रित होते है।
केशवरायपाटनन मेला - अक्टूबर-नवम्बर
यह दस दिवसीय मेला हर कार्तिक पूर्णिमा को शुरु होता है। तीर्थ यात्री इस समय यहां चंबल नदी में स्नान करते हैं और केशवरायजी मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं।
बूंदी - कैसे पहुंचे
हवाई अड्डा - जयपुर 210 किलोमीटर सबसे नजदीक हवाई अड्डा है।
रेल मार्ग - रेल मार्ग द्वारा चितौड़गढ़, आगरा और निमच से जुड़ा है।
सडक - बूंदी सड़क मार्ग से राजस्थान के प्रमुख शहरों से जुडा है। यहां से अजमेर, चितौड़गढ़, दिल्ली, इन्दौर, जयपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर और अलवर, उज्जैन व सवाईमाधोपुर के लिये बस सेवा उपलब्ध है।

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