Fairs and festivals of Jaipur, Rajasthan - (जयपुर के मेले और त्यौहार)

जयपुर के मेले और त्यौहार  Jaipur Ke Pramukh Mele Tyohaar

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जयपुर अपने त्यौहारों के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। इन त्यौहारों में भाग लेने एवं इन्हें देखने के लिए देश विदेशों से बडी संख्या में लोग हर साल यहां आते है। यहां के प्रमुख व प्रसिद्ध त्यौहार निम्न है। Jaipur tourism in Hindi | Jaipur Tour & Travel Guide in Hindi | Jaipur Tourist Places in Hindi | जयपुर पर्यटन

गणगौर - मार्च अप्रैल
यह रंग बिरंगा त्यौहार विशेषकर महिलाओं के लिए हैं। इस दिन महिलाएं सुंदर व रंग बिरंगे वस्त्र पहनकर मंदिरो ंमें माता पार्वती की पूजा अर्चना करती है। एक आरे अविवाहित लडत्रकियां अपने लिए अच्छे वर के लिए वरदान की कामना करती है तो दूसरी ओर विवाहित महिलाएं अपने पति के लिए दीर्घायु की कामना करती है। बगीचों से फूल चुनकर तथा कुओं से पानी के कलश भरकर महिलाएं सिटि पैलेस से गाती हुई अत्यंत ही सुंदर जुलूस निकालती है। जिसे देखने के लिए बडी मात्रा में पर्यटक एकत्रित होते है। Jaipur tourism, Jaipur Tourist Places, Jaipur Travel Guide, Jaipur Tourist Attractions
तीज - जुलाई - अगस्त
वर्षा ऋतु के श्रावण मास में होने वाले इस त्यौहार की अपनी अनूठी परंपरा है। इस त्यौहार के दिन अधिकतर बादल छाए रहते है तथा वर्षा भी होती है। इसीलिए इसे कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार भी महिलाओं का त्योहार है। इस दिन महिलाएं उपवास रखती है। रात में चंद्रमा के दर्शन व उसकी पूजा अर्चना करके अपने पती के दीर्घायु होने की कामना करती हैं तथा इसके पश्चात् अपना उपवास तोड़ती है।

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पतंगबाजी - मध्य जनवरी
यइ अंतर्राष्ट्रीय पतंगबाजी का तयौहार हर वर्ष चैदह जनवरी को मकर संक्रांति के दिन जयपुर में बडू धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन देश के विभिन्न शहरों से जाने माने पतंगबाज इस त्यासैहार पर पतंगबाजी में हिस्सा लेने के लिए आते है। पूरा आकाश रंग बिरंगी पतंगो से भर जाता है। इसी अवसर पर अनेक लोकनृत्यों व लोक गीतों का आयोजन किया जाता है।
एलीफेंट त्यौहार - मार्च अप्रैल
यह त्यौहार हाथियों, घोड़ों, एवं ऊंटों के जुलूस के साथ शुरु होता है। फिर लोकनृत्य लोक संगीत के अनेक कार्यक्रम होते हैं। हाथियों पर पोलो मैच, हाथी दौड, व उनके मुकाबले मुख्य आकर्षण होते है।
दशहरा - सिंतबर - अक्टूबर
यह त्यौहार श्रीराम की रावण पर विजय की खुशी में मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसी दिन रावण व उसके भाईयों के पुतले जलाए जाते हैं तथा आकर्षक आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है।
दीपावली - अक्टूबर-नवंबर
दीपों का यह त्योहा भगवान श्री राम के चैदह वष्र के वनवास के पश्चात् वापस अयोध्या आगमन की खुशी के रूप में मनाया जाता है। चारों तरफ दीपों की रोशनी से सजावट की जाती है। आजकल तो बिजली का जमाना है व समूचा शहर बिजली की रोशनी से चमकने लगता है। रात्रि में शहर का नजारा अत्यंत आकर्षक होता है। आतिशबाजी व पटाखों से सारा माहौल गूंज उठता हैं बूढे बच्चे सभी नई पोशाकें पहनते हैं व अभिवादन करते है। सारा माहौल खुशी में बदल जाता है।

 

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