जानिए भारत की सांस्कृतिक विरासत - त्रिपुरा

Janiye Bhartiya Sanskritik Virasat - Tripura

tripura
1972 में पूर्ण राज्य का दर्जा पाये त्रिपुरा की राजधानी अगरतला है। इसकी जनसंख्या 2001 के अनुसार  36,71,032 क्षेत्रफल 10,491 वर्ग किलोमीटर व जनसंख्या घनतव 350 वर्ग किलोमीटर है। राज्य में त्रिपुरी बांगला, बंगाली, मणिपुरी व ककवार्क भाषायें बोली जाती है।

मुख्य ऐतिहासिक जानकारी   The Main Historical Information

त्रिपुरा सन् 1949 में भारतीय संघ में शामिल हुआ था। यह एक पुरातन हिन्दु बहुल क्षेत्र है। भारत में शामिल होने से पूर्व यहां 1,300 साल तक महाराजाओं का अधिकार रहा था। राज्यों के पुनः गठन के समय त्रिपुरा 1 सितम्बर 1956 को संघशासित राज्य बना। 21 जनवरी 1972 में यह पूर्ण राज्य बन गया।
त्रिपुरा भारत का दूसरा सबसे छोआ प्रदेश है। इस राज्य के लोग बड़े स्नेह और मिलसार हेाते हैं। अन्य पर्यटन स्थलों की अपेक्षा त्रिपुरा के प्राकृकतिक दृश्य बहुत प्यारे और मनमोहक हैं। कल कल निनाद करते झरने हरियाली आंचल ओढे पव्रत तथा पक्षियों की चटचहाट इस हिल स्टेशन की खूबसूरती में वृद्धि करते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को अनोखी शांति का अनुभव होता है।

अगरतला  Agartala

एक छोटा सा राज्य त्रिपुरा और उसकी राजधानी अगरतला। अपने आंगन में अनूठी धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत संजाये हुए एक प्यारा शहर। इसके अन्दर और निकट में अनेक आकर्षक व सुन्दर स्थल हैं। यहां आकर पर्यटक खुश हो उठते हैं।
शहर के बीचो बीच उज्वंत पैलेस स्थित है। आजलक इसमें राज्य की विधानसभा का मुख्यालय स्थित है। जबकि पूर्व में यह एक महल था।
एक पहाड़ी पर बना है मां काली का खूबसूरत मंदिर। इस मंदिर पर प्रत्येक वर्श अक्टूबर में एक मेले का आयोजन होता है। जिसमें आस पास के बहुत से लोग आते हैं। यहीं एक सुन्दर कमला सागर नमाक बहुत बड़ी झील है। यह झील लर्यटकों को बहुत लुभाती है।
अगरतला के इतिहास और संस्कृति को दर्षाने वाली विभिन्न वस्तुओं को अपने में समेटे संग्रहालय भी यहांपर है। जहां पर्यटक इन सब चीजों को निकट से देख सकते है।
त्रिपुरा के राज्यपाल का सरकारी आवास कुंज भवन में बना है। यह भवन यहां के महारजा वीरेन्द्र किषोर मानिक बहादुर में 1917 में बनवाया था। अगरतला प्रवास पर आये गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर भी सन् 1926 में यहीं ठहरे थे।
स्थापत्य षिल्प का दुर्लभ नमूना जगन्नाथ मंदिर भी यहांपर स्थित है। अगरतला से 45 किलोमीटर के फासले पर ब्रह्मकुंड अवस्थित हैं अगरतला के उतर में यह बना है। जहां प्रत्येक बरस तीन बार मेले लगते है।

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